Showing posts with label साक्षी महाराज. Show all posts
Showing posts with label साक्षी महाराज. Show all posts

Wednesday, January 14, 2015

साक्षी महाराज के नाम पत्र

नमस्कार

एक औरत खड़ी है, 26 - 27 वर्ष की , तुम कहोगे, लड़की कहो। मैं कहूँगा, ठहरो ! आप पूरा वाक्य सुनें। उसके अगल बगल में गोद चढ़े दो बच्चे हैं। तीसरा उसके उभरे हुए पेट से मुझे आने का संकेत दे रहा है। उसकी ऊँगली पकड़े लिफ्ट राईट में दो शहर की स्लम बस्ती से गंदे मटमैले कपड़े पहने बच्चे खड़े हैं। यह दृश्य इंदौर के पलासिया चौराहे का , बठिंडा के हुनमान चौंक का, अहमदाबाद के इनकम टेक्स सर्किल का या दिल्ली के चाँदनी चौंक का है, यह पक्का पक्का याद नहीं, हाँ इतना पक्का है कि यह भारत के किसी शहर का है। और सच में यह महान चित्रकार पाब्लो पिकासो की कल्पना से उपजा चित्र नहीं है। हाँ, शत प्रतिशत सत्य है।

यदि आपको संदेह हो तो आप हाथ पर हाथ मारकर मुझ से शर्त लगा सकते हो। बस आपको मेरे साथ चलना होगा। हो सकता है कि आपको लगे मैं आपको अपने द्वारा तैयार किये नाटक दिखा दूँ। और आप हार जाएँ। तो आप के लिए एक और विकल्प है। हाँ । है ।

आप भारत का कोई सा भी महानगर चुनें। और आप उस महानगर के निम्न स्थलों का दौरा करें। किसी व्यस्त सर्किल का । किसी मंदिर का । किसी रेलवे स्टेशन का।

आपको जीवंत दृश्य देखने को मिल जायेगा। हाँ। मेरी शर्त है । शर्त अर्थात कंडीशन । आप इस दृश्य की नायिका से एक बच्चा सेना के लिए। एक बच्चा संन्यासी के लिए। दो को स्कूल छोड़ने के लिए ले लेना और महिला को हॉस्पिटल छोड़ आएं - परिवार नियोजन के लिए। और इसको समझाना के भगवान का प्रसाद सीमित होता है।

इससे एक और समस्या से बच जाएँगे। आप को बीजेपी कारण बताओ नोटिस जारी नहीं करेगी। एक मिसेड कॉल करवा बीजेपी की मेम्बरशिप दिलवा देना। 

एक अन्य बात यदि इनके पास आप से पहले कोई ईसाई पहुँच गया तो इसके लिए जिम्मेदार आप होंगे।

अभी मैं उसी जगह लौट रहा हूँ। जहाँ मैं हूँ। अपनी आँगन वाली खटिया पर। जहां सूर्य की रौशनी मेरे माथे के बीचोबीच पड़ रही है। मेरा ज्ञान चिक्षु रौशन हो उठा है।

मुझे आसमान में उड़ रहे पतंगों की सर सर आवाज़ आ रही है। आज उत्तरायन है। गुजरात में पतंग उड़ते हैं, इस दिन। 

राम राम

Wednesday, January 7, 2015

साक्षी महाराज! महाराज! महाराज! की विकास नीति

साक्षी महाराज! महाराज! महाराज! उनकी विकास नीति के बारे में सुनकर कुछ ऐसा ही मुंह से निकलेगा। उनकी विकास नीति पर बात करनी चाहिए। केंद्र सरकार को गंभीरता पूर्ण सोचना चाहिए। बकायदा अमल में लाने के लिए विशेष संसदीय सत्र बुलाना चाहिए। यदि बात न बन पा रही हो तो अध्यादेश लाना चाहिए।

साक्षी महाराज अद्भुत हैं। उनके विचार अद्भुत कैसे न होंगे। हिंदू धर्म ख़तरे में है। जब धर्म ख़तरे में हो, तो धर्म को बचाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। साक्षी महाराज कुछ भी तो गलत नहीं कह रहे, वो तो कह रहे हैं कि हिंदू महिला को चार चार बच्चे पैदा करने चाहिए। आखिर, महिलाएं बच्चे पैदा करने के लिए तो इस दुनिया में आई हैं। उनका अन्य कोई उद्देश्य थोड़ा है।

साक्षी महाराज को क्या फर्क पड़ता है ? यदि इससे देश में भूखमरी बढ़ जाए। क्या फर्क पड़ता है ? यदि किसी के पास सिर ढकने के लिए छत न हो। बस धर्म की नींव कहीं कमजोर न हो जाए। धर्म को मजबूत करने के लिए गरीबी के दिनों से गुजारने पड़े तो क्या बड़ी बात है ? आप इतना सा कार्य नहीं कर सकते।

शर्म तो मुझे इस बात पर आती है कि इक्कीसवीं सदी का भारत आज भी मूर्ख लोगों को देश चलाने की आज्ञा देता है। सबसे अधिक शर्म उन लोगों पर आती है, जो साधू संन्यासी की गरिमा को चोट पहुंचा रहे हैं। हिंदू धर्म को ख़तरा कम होती आबादी से नहीं, बल्कि ऐसे साधू संन्यासियों से है, जिनको संन्यास का सही अर्थ भी पता नहीं। जिनके हाथ में गीता तो है, लेकिन आत्मसात की बात आने पर गीता का एक श्लोक भी नहीं है।

हिंन्दू धर्म को ख़तरा हिंदू धर्म के ठेकेदारों से है या उन लोगों से जिनको समाज में जब इज्जत नहीं मिलती को साधू बनने निकल पड़ते हैं। जब साधू संन्यासी के रूप में हिट होते ही अपने पुराने रंग रूप में उतर आते हैं। अपने अंदर का तनाव समाज में फैलाने निकल पड़ते हैं। हमारे गांव में एक कहावत है साधू नूं की नाल स्वादां। साधूवत को पाना इतना आसान नहीं है। साधूवत वो स्थिति है, जहां सब अपना हो जाता है। कुछ भी गैर नहीं बचता। जब सब अपना हो जाता है तो ख़तरे का सवाल ही उत्पन्न नहीं होता है। ख़तरा तो वहां है, जहां मेरा बलवान है। घर गृहस्थी छोड़कर संन्यास को निकलने बाबा जब आम धारा में रहने वाले लोगों को नसीहत सलाह देते हैं तो हैरानी होती है।

महाराज ने बड़े आराम से कहा, चार बच्चे पैदा करो। एक को सीमा पर भेज दें। एक को साधू संन्यासी के साथ भेज दें। सांसद बन चुके साक्षी महाराज को शायद गृहस्थ जीवन की दुख तकलीफों की जानकारी नहीं है। उनको नहीं पता कि आज बीस हजार महीना कमाने वाला भी अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाता है। साक्षी महाराज के इस फार्मूले ने जमींदारों को मजदूर बनाकर रख दिया। बीस बीस एकड़ जमीन के मालिकों के बच्चे आज दो दो एकड़ जमीन के मालिक रह गए। साक्षी महाराज ने शायद बनारस के घाटों, महानगर की सड़कों पर एवं मंदिरों के बाहर भीख मांगने वालों की बढ़ती संख्या को नहीं देखा।

भारत आबादी के मामले में चीन से केवल कुछ लाख संख्या पीछे है। विश्व में आबादी के मामले में दूसरा स्थान भारत के पास है। आज विश्व का शायद ही कोई ऐसा देश हो, जहां पर भारतीय मूल का निवासी न हो। 1980 में एक सांसद के सवाल पर सरकार ने कहा था, दुनिया के 180 देशों में भारतीय रहते हैं। आज उस बात को करीबन तीन दशक हो चले हैं। आप सहज की अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत की आबादी विश्व के किस छोर तक पहुंच गई होगी। लेबर ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर तीसरा स्नातक पास युवा बेरोजगार है। साक्षी महाराज, आप आप सरकार में हैं, पहले इस समस्या का समाधान लाएं। उसके बाद देश की जनता आपकी विकास नीति पर ध्यान दे सकती है। साथ ही, एक अन्य बात, आज की पढ़ी लिखी महिला करियर एवं हेल्थ के प्रति संवेदनशील हो चुकी है। ऐसे में कितने घरों में घरेलू हिंसा होगी, आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा।

हां। आपकी विकास नीति बुरी नहीं होगी। यदि आप महिलाओं से बात करें। उनको बीस से पच्चीस लाख रुपया दें, उने सुरक्षित भविष्य के लिए। स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाएं। उस तरह की परिस्थितियां मुहैया करवाएं, जहां वो प्रसव पीड़ा से गुजरते हुए थोड़ा सा सुखद महसूस करें।

Labels

Valentine Day अटल बिहार वाजपेयी अंधविश्‍वास अध्यात्म अन्‍ना हजारे अभिव्‍यक्‍ति अरविंद केजरीवाल अरुण जेटली अहमदाबाद आतंकवाद आप आबादी आम आदमी पार्टी आमिर खान आमिर ख़ान आरएसएस आर्ट ऑफ लीविंग आस्‍था इंटरनेट इंडिया इमोशनल अत्‍याचार इलेक्ट्रोनिक मीडिया इस्‍लाम ईसाई उबर कैब एआईबी रोस्‍ट एनडीटीवी इंडिया एबीपी न्‍यूज एमएसजी ओएक्‍सएल ओह माय गॉड कटरीना कैफ कंडोम करण जौहर कांग्रेस किरण बेदी किसान कृश्‍न चन्‍दर क्रिकेट गजेंद्र चौहान गधा गरीबी गोपाला गोपाला घर वापसी चार्ली हेब्‍दो चुनाव चेतन भगत जन लोकपाल बिल जन समस्या जनसंख्या जन्‍मदिवस जापान जीतन राम मांझी जेडीयू जैन ज्योतिष टीम इंडिया टेक्‍नीकल टेक्‍नोलॉजी टेलीविजन टैलिप्राम्प्टर डाक विभाग डिजिटल इंडिया डिजीटल लॉकर डेरा सच्चा सौदा डॉ. अब्दुल कलाम तालिबान तेज प्रताप यादव द​ सन दिल्‍ली विधान सभा दिल्‍ली विधान सभा चुनाव देव अफीमची दैनिक जागरण दैनिक भास्कर द्वारकी धर्म धर्म परिवर्तन धोखा नई दुनिया नत्थुराम गोडसे नमो मंदिर नया संस्‍करण नरेंद्र मोद नरेंद्र मोदी नववर्ष नीतीश कुमार नीलगाय नूतन वर्ष पंजाब केसरी पंजाब सरकार पद्म विभूषण पवन कल्‍याण पाकिस्तान पान की दुकान पीके पेशावर हमला पोल प्‍यार प्रतिमा प्रमाणु समझौता प्रशासन प्रेम फिल्‍म जगत बजट सत्र बजरंग दल बराक ओबामा बाबा रामदेव बाहुबली बिग बॉस बिहार बीजेपी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बॉलीवुड भगवान शिव भगवानपुर मंदिर भाजपा भारत भारतीय जनता पार्टी मनोरंजन ममता बनर्जी महात्मा गांधी महात्मा मंदिर महाराष्‍ट्र महेंद्र सिंह धोनी माता पिता मार्कंडेय काटजू मीडिया मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मुसलमान मुस्लिम मोबाइल मोहन भागवत युवा पीढ़ी रविश कुमार राज बब्बर राजकुमार हिरानी राजनाथ सिंह राजनीति राजस्‍थान सरकार रामदेव राहुल गांधी रिश्‍ते रेप रेल बजट रेलवे मंत्री रोमन रोमन हिन्दी लघु कथा लीला सैमसन लोक वेदना लोकतंत्र वर्ष 2014 वर्ष 2015 वसुंधरा राजे वाहन विज्ञापन वित्‍त मंत्री विदेशी विराट कोहली विवाह विश्‍व वीआईपी कल्‍चर वैंकेटश वैलेंटाइन डे वॉट्सएप व्यंग शरद पावर शरद यादव शार्ली एब्‍दे शिवसेना शुभ अशुभ शेनाज ट्रेजरीवाला श्रीश्री श्रीश्री रविशंकर सकारात्‍मक रविवार संत गुरमीत राम रहीम सिंह सफलता समाजवाद समाजवादी पार्टी सरकार सरदार पटेल सलमान खान साक्षी महाराज सिख सिख समुदाय सुकन्‍या समृद्धि खाता सुंदरता सुरेश प्रभु सोनिया गांधी सोशल मीडिया स्वदेशी हास्‍य व्‍यंग हिंदी कोट्स हिंदु हिंदू हिंदू महासभा हिन्दी हिन्‍दू संगठन हेलमेट हैकर हॉलीवुड