Showing posts with label गजेंद्र चौहान. Show all posts
Showing posts with label गजेंद्र चौहान. Show all posts

Sunday, July 12, 2015

गजेंद्र चौहान पर इतने लाल पीले क्‍यों हो रहे हैं

महाभारत में युधिष्‍ठर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान को लेकर कुछ लोग इस तरह तिलमिला रहे हैं, जैसे गली की रामलीला में अभिनय करने वाले को एफटीआईआई का चेयरमैन बना दिया गया हो। आलोचना करने वाले भूल गए कि गजेंद्र चौहान के पास दो दशक से लंबा अनुभव है, अभिनय की दुनिया में, और 160 से अधिक फिल्‍मों एवं 600 के करीब धारावाहिकों में अभिनय कर चुके हैं। फिल्‍म ए ग्रेड की और या बी ग्रेड की, बैनर छोटा हो या बड़ा, इससे अधिक फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है, जब आपको अभिनय नहीं आता।

बॉलीवुड में बहुत सारे युवा अभिनेता हैं, जो बड़े बजटों की फिल्‍मों में काम करते हैं, मगर अभिनय के नाम पर कुछ भी नहीं आता, लेकिन सालों से चल रहे हैं। क्‍या उनको एफटीआईआई का चेयरमैन बना देना चाहिए। बॉलीवुड में हजारों सितारे हैं, मगर, हर सितारा अपने आपको दूसरे से बड़ा समझता है। हो सकता, जो सितारा आपको पसंद हो, दूसरे न भी हो। क्‍योंकि सबकी पसंद एक सी नहीं होती।

गजेंद्र चौहान को बहुत सारे मीडिया वाले जजमेंटल हो चुके हैं, क्‍या गजेंद्र चौहान को काम करने का अवसर दिया, क्‍या उसको अपनी क्षमता साबित करने का अवसर दिया। हो सकता है कि इसमें सरकार ने अपनी मनमानी की हो, हो सकता है कि गजेंद्र चौहान ने अपनी निकटता का लाभ लिया हो, मगर, इस पूरे मामले में जिम्‍मेदारी सरकार की है, और सरकार को पांच साल दे दिए हैं, वो किस को मानव संसाधन मंत्री बनाए, वो किस को विदेशी मंत्री बनाकर भारत की यात्रा करने का अवसर दे, वो सरकार की जिम्‍मेदारी है।

केवल किसी की नपसंद या पसंद पर किसी व्‍यक्‍ति विशेष को बुरे तरीके से नकार देना गलत है। बॉलीवुड के बड़े सितारों को दिक्‍कत हो सकती है, क्‍योंकि गजेंद्र चौहान को यकीनन वो मिला है, जो दूसरों को मिलना चाहिए था, लेकिन सवाल यह है कि जो सितारे विरोध कर रहे हैं, क्‍या उन्‍होंने अपने व्‍यक्‍तिगत जीवन जरूरतों से बाहर निकलकर देश हित में कुछ किया , क्‍या कभी उन्‍होंने ऐसी फिल्‍मों का निर्माण जो देश को नई दिशा में ले जाएं, एफटीआईआई तो केवल कुछ प्रतिभाओं को निखारेगा, जो आगे चलकर करण जौहर, यशराज बैनर के लिए काम करेंगी, और उन को वैसा ही कार्य करना होगा, जैसा बैनर के लोग चाहेंगे।

एक पत्रकार जब कॉलेज से निकलता है, तो उसको लगता है कि उसकी कलम देश का नसीब बदल देगी, मगर, बाद में अनुभव होता है कि उसकी कलम की निब तो मालिक ने निकाल ली है, अब तो केवल पेंसिल से लिखना है, जिसमें से मालिक अपने जरूरत अनुसार शब्‍द रख लेगा, बाकी के रब्‍बर से मिटा देगा।

रविश कुमार मेरे पसंदीदा कलमकारों में से है। टीवी पर तो रविश कुमार हिट हुआ, लेकिन उससे पहले ब्‍लॉग पर बेबाक राय के लिए हिट हुआ। मुझे खुशी हुई, जब एनडीटीवी का चेहरा केवल रविश कुमार बन गया, ऐसा नहीं कि एनडीटीवी के अंदर इसको भी लेकर कभी बहस न चली होगा, इस पर भी उंगलियां न उठी हों, होता है जब कोई भीड़ से निकलकर आता है, और रविश कुमार वो चेहरा है जो भीड़ से निकलकर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुआ।

वरना तो भारत के ज्‍यादातर लोग आजतक, स्‍टार न्‍यूज एवं जी न्‍यूज को ही ए ग्रेड के न्‍यूज चैनल मानते थे, मगर रविश कुमार, और उनके संस्‍थान की सख्‍त मेहनत एनडीटीवी को उस कतार में लाकर खड़ा कर दिया, जहां यह चैनल थे। इन परिस्‍थितियों में यदि रविश कुमार को किसी मीडिया रेगुलेटरी का उच्‍च पद दे दिया जाए तो मुझे इस आधार पर आलोचना करने का कोई हक नहीं होना चाहिए कि रविश कुमार एनडीटीवी में कार्य करते हैं, उनके पास आज तक, जी न्‍यू एवं स्‍टार न्‍यूज का अनुभव नहीं।

अंत, गजेंद्र चौहान को कुछ वक्‍त दो। यदि वे अपनी जिम्‍मेदारियों को निभाने से चूकते हैं तो खुलकर विरोध करो। सबूतों के साथ करो। अभी कुछ समय ठहरो। ठहरना पड़ेगा, क्‍योंकि हमने एक ऐसी सरकार चुनी है, जो किसी की नहीं सुनती, केवल मन की बात कहती है, और मन की बात केवल एक व्‍यक्‍ति करता है, आपको सुननी हो सुनो, नहीं सुननी हो न सुनो। हां, पांच साल बाद बाहर का रास्‍ता दिखा सकते हैं, यदि बातों से उब जाएं, और सरकार अपने प्रदर्शन से चूक जाए।

Labels

Valentine Day अटल बिहार वाजपेयी अंधविश्‍वास अध्यात्म अन्‍ना हजारे अभिव्‍यक्‍ति अरविंद केजरीवाल अरुण जेटली अहमदाबाद आतंकवाद आप आबादी आम आदमी पार्टी आमिर खान आमिर ख़ान आरएसएस आर्ट ऑफ लीविंग आस्‍था इंटरनेट इंडिया इमोशनल अत्‍याचार इलेक्ट्रोनिक मीडिया इस्‍लाम ईसाई उबर कैब एआईबी रोस्‍ट एनडीटीवी इंडिया एबीपी न्‍यूज एमएसजी ओएक्‍सएल ओह माय गॉड कटरीना कैफ कंडोम करण जौहर कांग्रेस किरण बेदी किसान कृश्‍न चन्‍दर क्रिकेट गजेंद्र चौहान गधा गरीबी गोपाला गोपाला घर वापसी चार्ली हेब्‍दो चुनाव चेतन भगत जन लोकपाल बिल जन समस्या जनसंख्या जन्‍मदिवस जापान जीतन राम मांझी जेडीयू जैन ज्योतिष टीम इंडिया टेक्‍नीकल टेक्‍नोलॉजी टेलीविजन टैलिप्राम्प्टर डाक विभाग डिजिटल इंडिया डिजीटल लॉकर डेरा सच्चा सौदा डॉ. अब्दुल कलाम तालिबान तेज प्रताप यादव द​ सन दिल्‍ली विधान सभा दिल्‍ली विधान सभा चुनाव देव अफीमची दैनिक जागरण दैनिक भास्कर द्वारकी धर्म धर्म परिवर्तन धोखा नई दुनिया नत्थुराम गोडसे नमो मंदिर नया संस्‍करण नरेंद्र मोद नरेंद्र मोदी नववर्ष नीतीश कुमार नीलगाय नूतन वर्ष पंजाब केसरी पंजाब सरकार पद्म विभूषण पवन कल्‍याण पाकिस्तान पान की दुकान पीके पेशावर हमला पोल प्‍यार प्रतिमा प्रमाणु समझौता प्रशासन प्रेम फिल्‍म जगत बजट सत्र बजरंग दल बराक ओबामा बाबा रामदेव बाहुबली बिग बॉस बिहार बीजेपी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बॉलीवुड भगवान शिव भगवानपुर मंदिर भाजपा भारत भारतीय जनता पार्टी मनोरंजन ममता बनर्जी महात्मा गांधी महात्मा मंदिर महाराष्‍ट्र महेंद्र सिंह धोनी माता पिता मार्कंडेय काटजू मीडिया मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मुसलमान मुस्लिम मोबाइल मोहन भागवत युवा पीढ़ी रविश कुमार राज बब्बर राजकुमार हिरानी राजनाथ सिंह राजनीति राजस्‍थान सरकार रामदेव राहुल गांधी रिश्‍ते रेप रेल बजट रेलवे मंत्री रोमन रोमन हिन्दी लघु कथा लीला सैमसन लोक वेदना लोकतंत्र वर्ष 2014 वर्ष 2015 वसुंधरा राजे वाहन विज्ञापन वित्‍त मंत्री विदेशी विराट कोहली विवाह विश्‍व वीआईपी कल्‍चर वैंकेटश वैलेंटाइन डे वॉट्सएप व्यंग शरद पावर शरद यादव शार्ली एब्‍दे शिवसेना शुभ अशुभ शेनाज ट्रेजरीवाला श्रीश्री श्रीश्री रविशंकर सकारात्‍मक रविवार संत गुरमीत राम रहीम सिंह सफलता समाजवाद समाजवादी पार्टी सरकार सरदार पटेल सलमान खान साक्षी महाराज सिख सिख समुदाय सुकन्‍या समृद्धि खाता सुंदरता सुरेश प्रभु सोनिया गांधी सोशल मीडिया स्वदेशी हास्‍य व्‍यंग हिंदी कोट्स हिंदु हिंदू हिंदू महासभा हिन्दी हिन्‍दू संगठन हेलमेट हैकर हॉलीवुड